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Archive for March, 2009

शादी के बाद की चुदाई

March 7th, 2009
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प्रेषक : न्यूड मैन

मैं एक शादीशुदा पुरुष हूँ, मेरा नाम राज है। मैं मुंबई का रहने वाला हूँ और मुझे सेक्स की बातें अच्छी लगती है।

मेरी कहानी कुछ एक साल पुरानी है। जब मैं नेट में कुछ काम कर रहा था तब कोई साईट खुल गई जो दोस्त बनाती है। वहाँ जाने से मुझे कुछ दोस्त मिल गए। वहाँ से मैंने लड़कियों से बातें करनी चालू की।

और वहाँ एक लड़की बहुत आज़ाद किस्म की निकली। हम करीबन एक साल सेक्सी बातें करते रहे।

उसके बाद एक दिन उसने मेरा फ़ोन नम्बर माँगा तो मैंने उसे अपना फ़ोन नम्बर दे दिया। उसके पहले मैंने उससे कई बार उसका फ़ोन नम्बर माँगा था पर उसने मना किया था, और आज उसने अपने आप से मेरा नम्बर माँगा तो मैंने उसे दे दिया। फ़िर एक दिन उसने मुझे कहा- उसकी चूत में बहुत खुजली हो रही है उसे मिटाओ ना !

मैंने उसे बुलाया एक जगह और हम दोनों ने जम के चुदाई की।मैंने उसे बहुत आनंद दिया, वो मेरे लंड की दीवानी हो गई। उसने मेरा सारा पानी अपने मुँह में लिया और निगल गई। तब मुझे भी उसकी चूत का रसपान करने में बहुत मजा आया। वो मुझे फ़िर से मिलने को मना करके चली गई। उसके जाने के बाद मुझे आज तक उसकी चूत की बहुत याद आ रही है। मैं दूसरी चूत के लिए आज भी ऑनलाइन रहता हूँ अगर कोई लड़की मिल जाए तो।

मैं अभी तक खुल के नहीं लिखा पाया हूँ। पर वादा करता हूँ अगर कोई और मिलेगी तब शायद कुछ ज्यादा लिख पाऊंगा आपको मेरी कहानी कैसी लगी मुझे उत्तर देना प्लीज़

काजल को चौदा

March 7th, 2009
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प्रेषक : लव यू जे

यही कहानी एक और प्रेषक वीर बहादुर speed2saini@yahoo.com ने एक ही दिन भेजी है, केवल पात्रों के नाम बदले हुए हैं।

हमारे घर के पड़ोस में एक परिवार रहता था। उनकी एक लड़की थी। उसका नाम काजल था। उसकी उमर लगभग १८ साल की थी। वो एकदम मस्त चीज़ थी उसके बूब ३०-३२ साइज़ के थे अपनी बॉडी से वो पूरी जवान लड़की लगती थी। उनके घर पर एक कंप्यूटर भी था। काजल बहुत ही सेक्सी थी। मैं उसे चौदना चाहता था वो भी मुझे आते जाते अपने घर की छत पर से देखती थी और मुझे देख कर मुस्कुराती भी थी लेकिन कोई मौका नहीं मिल पा रहा था।

यह उस समय की बात है जब काजल के माता-पिता ५-६ दिन के लिए कहीं चले गये थे। घर पर केवल काजल ही अकेली थी। दूसरे दिन काजल अपने घर के बाहर दरवाजे पर मुझे खड़ी दिखाई दी। मैंने उसे देखा तो वो मुस्कुराई और मुझे बुलाया।

जब मैं उसके पास गया तो वो बोली कि आप को अगर कंप्यूटर ठीक करना आता हो तो प्लीज़ हमारा कंप्यूटर ठीक दो ना प्लीज़ ! और मुझे घर में आने का इशारा किया। मैं स्कूल जा रहा था इसलिए मैं शाम को आने के लिए कह कर स्कूल चला गया।

स्कूल से वापस आने के बाद मैं काजल के घर ५ बजे शाम को पहुँच गया। मैने कॉल बेल बजाई तो काजल ने दरवाज़ा खोला। उसने काले रंग की स्कर्ट और पिंक रंग की टी-शर्ट पहन रखी थी। उसने अंदर कुछ भी नहीं पहन रखा था। उसकी चूचियों के दोनो निपल्स बाहर से ही महसूस हो रहे थे।

मैं घर के अंदर गया। वो मुझे कंप्यूटर के पास ले गयी। मैने कंप्यूटर को ओन किया और चेक करने लगा।

काजल चाय बनाने चली गयी। मैने एक फोल्डर को खोला जो काजल ने बनाया था। उस में बहुत सारी अश्लील तस्वीरें थी। मैं उन तस्वीरों को देखने लगा। उसमें नेट से डाउनलोड की हुई बहुत सारी सेक्सी पिक्चर थी। मैं उन पिक्चर को देखने लगा। थोड़ी देर बाद वो चाय ले कर आ गयी। उस समय कंप्यूटर स्क्रीन पर जो फोटो थी उसमें एक आदमी एक लड़की को डॉगी स्टाइल में चोद रहा था।

वो मेरे बगल में बैठ गयी और बोली, ” प्लीज़ ये फाइल्स बंद कर दो। इसे मत देखो।”

मैने कहा, “बहुत अच्छी पिक्चर है।”

काजल का चेहरा शरम से लाल हो गया।

मुझे देखने दो।

वो बोली, “प्लीज़ जीतू बंद कर दो इसे।”

मैने कहा, “मैं कोई ग़लत काम थोड़े ही कर रहा हू। आख़िर तुम भी तो ये पिक्चर देखती होगी। तुम भी जावन हो और मैं भी। तुमने कभी ट्राइ किया है?”

वो चुप रही तो मैने फिर पूछा।

वो बोली, “मैं अभी तक कुँवारी हूँ। मैने कभी किसी से नहीं करवाया है।”

मैने उस से झूठ बोला और कहा, “मैने भी आज तक किसी लड़की के साथ कुछ नहीं किया है। घर पर भी कोई नहीं है। चलो, आज हम दोनों इसे ट्राइ करते हैं।”

उसने इनकार कर दिया तो मैने पूछा, “क्यों?”

इस बार वो कुछ नहीं बोली और उसने अपना सर दूसरी तरफ घुमा लिया। मैने उसके चेहरे को पकड़ कर अपनी तरफ घुमाया तो उसने मेरा हाथ झटक दिया। मैने फिर पूछा, “हम दोनो ही कुंवारे हैं और आज अच्र्छा मौका है। तुम भी जवान हो और मैं भी। घर पर भी कोई नहीं है। हमें ट्राइ करना चाहिए।”

वो एक दम चुप रही। मैने उसकी जांघों पर हाथ फिरना शुरू कर दिया तो उसने मेरा हाथ पकड़ लिया। उसने अपनी दोनों जांघों को एक दूसरे पर रख कर ज़ोर से दबा लिया। मैने उसकी जांघों को सहलाते हुए अपना हाथ उसकी जांघों के बीच घुसा दिया। मेरा हाथ सीधा उसकी चूत पर लगा। उसने नीचे भी कुछ नहीं पहन रखा था। उसकी चूत एकदम मुलायम और चिकनी थी।

उसने इस बार मेरा हाथ नहीं हटाया। मैं समझ गया कि मेरा काम बन जाएगा। मैने उसकी चूत को सहलाना शुरू कर दिया तो उसकी साँसें बहुत तेज़ चलने लगी और उसका चेहरा एक दम लाल हो गया। वो कुछ नहीं बोली।

थोड़ी देर तक उसकी चूत सहलाने के बाद मैं उठा। मैने उसे गोद में उठा लिया और बेडरूम में ले जाने लगा तो उसने अपना चेहरा मेरे सीने में छुपा लिया। बेडरूम में ले जा कर मैंने उसे बेड पर लिटा दिया। मैने उसकी टी-शर्ट और स्कर्ट उतार दी। उसके कपड़े उतारने के बाद मैने भी अपने सारे कपड़े उतार दिए। मुझे नंगा होते देख उसने अपनी आँखें बंद ली लेकिन उसके चेहरे पर मुस्कुराहट थी। उसका संगमरमर सा गोरा बदन एक दम नंगा मेरे सामने था। मुझे जोश आने लगा। मैं उसके होठों को चूमना शुरू कर दिया। थोड़ी देर तक होठों को चूमने के बाद मैने धीरे धीरे उसके चुचियों को, पेट को, जांघों को और फिर उसकी चूत को चूमने लगा।

वो एक दम गरम हो गयी और सिसकारियाँ भरने लगी। मेरा लंड भी खड़ा हो कर जोश से एक दम लोहे जैसा हो गया था और झड़ने वाला था। मैंने अपना लंड उसके मुँह के पास कर दिया और चूसने को कहा। वो कुछ नहीं बोली। मैने उसके मुँह में अपना लंड घुसाने की कोशिश की तो उसने अपना मुँह इधर उधर करना शुरू कर दिया। थोड़ी देर ना नुकर करने के बाद आख़िर में उसने अपना मुँह खोल दिया। मैने अपना लंड उसके मुँह में डाल दिया और वो उसे चूसने लगी।

मैं उसके उपर लेट गया और मैने उसकी चूत चाटनी शुरू कर दी। दो मिनट बाद ही मैं उसके मुँह में झड़ गया और उसने मेरे लंड का सारा पानी निगल लिया। लंड का सारा पानी निगल जाने के बाद भी उसने मेरा लंड चूसना ज़ारी रखा।

वो भी अब तक बहुत जोश में आ गयी थी और उसकी चूत से भी पानी निकलने लगा। मैने भी उसकी चूत का सारा पानी चाट लिया। वो एक दम नमकीन और कुछ कुछ खट्टा था।

दस मिनट में ही मेरा लंड फिर से खड़ा हो गया। मैं भी अभी तक उसकी चूत को चाट रहा था और वो भी अपना चूतड़ उठा उठा कर मज़ा ले रही थी। हम दोनो बहुत जोश में आ गये थे। मैं उसके उपर से हट गया और उसे डॉगी स्टाइल में होने को कहा। वो कुछ नहीं बोली और चुप-चाप उठ कर डॉगी स्टाइल में हो गयी। उसने अपना सर तकिये पर टिका दिया। मैं समझ गया कि वो चुदवाने के लिए एक दम बेकाबू हो रही है। मैं उसके पीछे आ गया। मैने उसकी चूत को फ़ैला कर अपने लंड का सूपाड़ा उसकी चूत के बीच रख दिया। वो कुछ नहीं बोली। मैने अपना लंड थोड़ा सा अंदर दबाया। उसकी चूत बहुत टाइट थी और केवल मेरे लंड का सूपाड़ा ही उसकी चूत के अंदर घुस पाया।

मैने थोड़ा और दबाया तो वो पहली बार बोली, “प्लीज़। ज़रा धीरे।”

मैं समझ गया कि वो एक दम जोश में आ गयी है। मैने अपना लंड थोड़ा और अंदर दबाया तो वो सिसकारियाँ भरने लगी। मेरा लंड उसकी चूत में अब तक २” घुस चुका था। मैने अपना लंड उसकी चूत में धीरे धीरे अंदर बाहर करना शुरू कर दिया। उसने भी अपना चूतड़ पीछे की तरफ दबाया और सिसकारियाँ भरने लगी, उफ़फ्फ़।।। जीत।।। धीरे।।। प्लीज़। दर्द हो रहााआ है।।।।। उईए।।।। म्माआआआ।।।।।। आआआहह।।। रुक्कककककक।।।।। जाओ।।।।।।। मैं रुक गया। वो बोली, “जीतू, मैं पहली बार करवा रही हू। ज़रा आराम से धीरे धीरे करो। बहुत दर्द हो रहा है।” मैने कहा, “तुम घबराओ मत। मैं धीरे धीरे और आराम से ही करूँगा। मैं जानता हूँ कि तुम अभी तक कुँवारी हो और तुम्हारी चूत एक दम टाइट है।” मैने धीरे धीरे अपना लंड उसकी चूत में अंदर बाहर करना शुरू कर दिया।

छः सात मिनट तक चोदने के बाद उसे भी और ज़्यादा मज़ा आने लगा। वो बोली, “जीतू, तुम अपना लंड थोड़ा सा और अंदर डाल दो। मैं तैयार हूँ।” मैंने थोड़ा सा और दबाया तो मेरा लंड उसकी चूत में ३” तक घुस गया। वो फिर बोली, “बस, रुक जाओ प्लीज़। दर्द हो रहा है। अभी इतना ही अंदर डाल कर चोदो मुझे।”

उसकी सील टूट चुकी थी और वो अब मेरा लंड अपनी चूत में आराम से अंदर ले रही थी। मैने उसे धीरे धीरे चौदना शुरू कर दिया। दो तीन मिनट में ही उसका दर्द जब कुछ कम हुआ तो उसे मज़ा आने लगा। वो बोली, ” थोड़ा और अंदर डाल कर और तेज़ी।।।। से चोदो।।। मुझे।” मैने थोड़ा और अंदर दबाया तो मेरा लंड उसकी चूत में ४” तक घुस गया। मैं अपनी स्पीड को बढ़ाते हुए उसे चोदने लगा। वो अपना चूतड़ आगे पीछे करते हुए मेरा साथ दे रही थी।

पाँच मिनट तक चोदने के बाद वो बहुत ज्यादा जोश में आ गयी और बोली, “जीतू, और अंदर डालो अपना लंड मेरी चूत में। खूब तेज़ चोदो मुझे। अब रुकना नहीं, पूरा लंड अंदर घुसा देना। मैं एक दम बेकाबू हो रही हू और मुझसे बर्दाश्त नहीं हो रहा है।”

मैंने अपना लंड थोड़ा और अंदर दबाया तो मेरा लंड उसकी चूत में ५” तक घुस गया। मैने उसे धीरे धीरे चौदना शुरू कर दिया। थोड़ी देर तक चोदने के बाद मैने एक ज़ोरदार धक्का लगा दिया। मेरा लंड उसकी चूत में ६” तक घुस गया। वो चिल्ला उठी लेकिन उसने मुझे रुकने के लिए नहीं कहा। मैने एक फाइनल शॉट लगा दिया तो वो बहुत तेज़ चिल्लाने लगी। मेरा पूरा लंड उसकी चूत में एक दम ज़ड़ तक घुस चुका था।

वो बोली, “जीतू, तुमने आख़िर मुझे आज एक लड़की से औरत बना ही दिया। मैने अपनी चूत में तुम्हारा पूरा लंड अंदर ले ही लिया। बहुत दर्द हो रहा है। थोड़ा रुक जाओ, तब चौदना।” मैं रुक गया।

थोड़ी देर बाद जब वो शांत हुई तो उसने मुझसे चोदने के लिए कहा। मैने काजल की चुदाई शुरू कर दी। पहले बहुत धीरे धीरे उसके बाद मैने बहुत तेज़ी के साथ चौदना शुरू कर दिया। ५ मिनिट तक उसे चुदवाने में थोड़ा दर्द हुआ लेकिन उसके बाद वो एक दम शांत हो गयी और उसे मज़ा आने लगा। उसने अपना चूतड आगे पीछे करते हुए मेरा साथ देना शुरू कर दिया। २ मिनट बाद ही वो बोली, “और तेज़ चोदो, मेरे जीतू राजा। ज़ोर ज़ोर से धक्के लगाओ।” मैने अपनी स्पीड बढ़ा दी और बहुत तेज़ तेज़ धक्के लगाने लगा। वो अब अपनी चूत में मेरा पूरा लंड आराम के साथ अंदर ले रही थी। २ मिनट भी नहीं बीते की वो फिर बोली, “जीतू, मुझे कुछ हो रहा है। लगता है मेरी चूत से पानी निकलने वाला है। खूब ज़ोर ज़ोर से धक्का लगाओ।” मैं समझ गया कि वो झड़ने वाली है। मैने बहुत ही तेज़ी के साथ उसकी चुदाई शुरू कर दी।

वो बोली, “आआआ!!! मैंऽऽऽ आआआऽऽऽ रहीऽऽऽ हूँऽऽऽ और तेज़ ऽऽऽ और तेज़ ऽऽऽ” उसकी चूत से पानी निकलने लगा और मेरा सारा लंड भीग गया। मैं भी बिना रुके उसे आँधी की तरह चोदता रहा। लगभग २० मिनट तक चोदने के बाद मैं उसकी चूत में ही झड़ गया। इस दौरान वो भी ३ बार झड़ चुकी थी। लंड का पूरा पानी उसकी चूत में निकल जाने के बाद मैं हट गया।

हम दोनो तक गये थे। कुछ देर आराम करने लगे।

१५ मिनट बाद वो बोली, “जीतू, प्लीज़। एक बार और करो ना। मुझे बहुत अच्र्छी लग रही थी यह चुदाई।” उसने मेरा लंड चूसना शुरू कर दिया। दस मिनट में ही मेरा लंड एक दम तैयार हो गया। मैने उसे बेड पर लिटा दिया और उसके चूतड़ के नीचे २ तकिये रख दिए। उसकी चूत एक दम उपर उठ गयी। मैने उसकी चूत के बीच जैसे ही अपना लंड रखा तो वो बोली, “जीतू, मुझे बहुत मज़ा आया था। इस बार तुम अपना लण्र्ड को एक ही धक्के में पूरा अंदर डाल दो।” मैने अपनी सासें रोक कर अपने को थोड़ा तैयार किया और पूरा ज़ोर लगते हुए एक करारा धक्का मारा। मेरा पूरा लंड सनसंता हुए उसकी चूत में घुस गया। वो बहुत तेज़ चीख पड़ी।

मैने बिना रुके उसकी चुदाई शुरू कर दी। २ मिनट में ही वो अपना चूतड़ उठा उठा कर मेरे हर धक्के का जवाब देने लगी। मैने अपनी स्पीड और बढ़ा दी। ५ मिनट की चुदाई के बाद वो झड़ गयी। उसकी चूत एक दम गीली हो चुकी थी और मेरा लंड भी उसकी चूत के पानी से एक दम गीला हो चुका था। मैं रुका नहीं, उसको चोदता रहा। कमरे में फ़च-फ़च की आवाज़ गूँज रही थी। इस बार मैने उसे बिना रुके उसको चौदा और उसकी चूत में ही झड़ गया। लंड का पूरा पानी उसकी चूत में निकाल देने के बाद मैं हट गया और उसके बगल में ही लेट गया। वो भी थक कर चूर हो गयी थी और एक दम निढाल हो गयी थी। वो बेड पर ही पड़ी रही।

luvcome1st@gmail.com

शरण की लूँ तो कैसे

March 7th, 2009
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प्रेषक : राकेश

हैलो ! … मेरा नाम राकेश है और मैं जालंधर का रहने वाला हूँ और मैं ३० साल का हूँ। आज मैं आपको अपनी सच्ची लव स्टोरी के बारे में बताने जा रहा हूँ।

बात ५ साल पहले की है जब मैं एक कंपनी से दूसरी कंपनी में काम करने के लिए आया। नए ऑफिस में दो लड़कियां पहले से ही काम कर रही थी। दोनों गजब की स्मार्ट और सेक्सी थी। एक की उमर ३३ साल की थी, नाम शरण था और मुझे लाइन भी दे रही थी। वो मुझे बहुत सेक्सी और पटने वाली लगी। धीरे धीरे मैंने उस से दोस्ती कर ली।

तीन महीने के बाद मैंने उस से पूछा कि क्या उसको मुझसे प्यार है। वो घबरा गयी और कुछ नही बोली। उसके मुम्मे घबराहट से बड़े हो गए और होंठ सूख गए। दूसरे दिन वो ऑफिस में मेरे पास वाली सीट पे बैठी थी। मैंने उस से किस मांगी। पर उसने इनकार कर दिया। फ़िर मैं धीरे से उसके पास गया और हाथ पकड़ के किस करने की कोशिश की। उसने मुझे नहीं रोका और मैंने पहली बार किसी लड़की के होंठ चूसे। उसके हाथ और चेहरा बहुत गर्म हो गया। फ़िर कुछ देर बाद उसने मुझे पीछे कर दिया। और इस तरह पहले चुम्बन से सिलसिला शुरू हो गया।

फ़िर मैंने उसे बाहर मिलने के लिए जोर डाला। पर शरण नहीं मानी। फ़िर कुछ दिन बाद मेरे ऑफिस के दूसरे लड़के की रात की शादी थी। उसने सब को शादी में बुलाया। मेरे मन में आया कि मैं शरण को इस शादी की रात चोदूंगा और ऐसा ही हुआ।

शादी में शरण भी आ गयी। वो बहुत सेक्सी लग रही थी और सलवार कमीज में थी कमीज का गला बड़ा था और उसके मुम्मों की बीच की लाइन साफ़ नज़र आ रही थी। मैंने उससे बोला कि शादी के बाद मैं उससे अपनी कार में घर छोड़ दूंगा और वो मान गयी। सो, शादी में कुछ देर एन्जॉय करने के बाद मैं शरण को कार में लेके निकल पड़ा। थोड़ा दूर जा के मैंने कार साइड में लगा दी और शरण से किस मांगी। उसने इंकार नहीं किया। मैंने उसे कार में ही किस करना शुरू किया।

पहले ऊपर का होंठ खूब चूसा, फ़िर नीचे वाला चूस के लाल कर दिया, फ़िर मैंने उसकी कमीज में हाथ डाल दिया और पेट को सहलाते हुए मुम्मे तक पहुँच गया, साथ में लिप किस भी हो रही थी। फ़िर मैंने उसकी कमीज ऊपर की और ब्रा के ऊपर से उसके मुम्मों को खूब रगड़ा। शरण पूरी गरम हो गयी थी। फ़िर मैंने पीछे से उसकी ब्रा की हूक खोली और उसके दोनों मुम्मों में अपना मुँह दे दिया। अब तो मेरा लंड खूब फर्राटे मार रहा था।

फ़िर मैंने धीरे से उसकी सलवार का नाला खोल दिया और झट से अपना हाथ बीच में डाल कर उसकी चूत पकड़ ली। उसने पैंटी नहीं पहनी थी। वो एकदम से घबरा गयी और जान गयी की आज वो ज़रूर चुद जायेगी। उसने मुझे रोकने की कोशिश की पर मैं नहीं रुका। उसकी चूत पे थोड़े से ही बाल थे। मैंने उसकी चूत में खूब ऊँगली दी। उसकी चूत पूरी लाल और गीली हो गयी थी। फ़िर मैंने उसकी सलवार उतार दी, उसकी चूत के बाहर के हिस्से को खूब रगड़ा। मेरा लंड उसकी चूत का स्वाद चखने को तैयार था। उसकी चूत में से पानी निकल के कार की सीट पे जा रहा था।

फ़िर मैंने अपनी पैंट उतारी और शरण के ऊपर चढ़ गया। मैंने अपना लंड उसकी चूत की मोरी पे रख दिया पर अंदर धक्का नहीं दिया। शरण तड़प उठी और बोली कि अब अपना लंड अंदर डाल दो। फ़िर मैंने एक ही झटके में अपना पूरा बड़ा लंड उसकी चूत में दे दिया और जोर से झटके मारने लगा। उसको पहले दर्द हुआ फ़िर मज़ा आने लगा। उसने भी अपनी गांड ऊपर उठा के झटके देने शुरू कर दिए। मैंने उसकी गांड को पकड़ लिया और जोर से अपना लंड उसकी बच्चेदानी तक ले गया। वो फिस फिस करने लगी। फ़िर मैंने झटके के साथ साथ शरण के मुम्मों को दबोचा, किस किया, काटा, निप्पल को चूसा।

फ़िर मैंने अपना लंड उसकी चूत में से निकाल के उसे उल्टा करके पीछे से उसकी चूत को पकड़ के फ़िर चूत में डाल दिया। उसकी गांड पे झटके लग रहे थे। मैंने उसकी गांड पकड़ के पूरी चौड़ी कर दी और फ़िर गांड की मोरी में अपनी उंगली दे दी। इसी बीच वो डिस्चार्ज हो गयी और बाद में मेरा लंड भी उसकी चूत में डिस्चार्ज हो गया। और इस तरह से लगभग आधा घंटा मैने उसके साथ सेक्स का मज़ा लिया। शरण ने भी खूब चुदने का मज़ा लिया।

उस रात के बाद मैंने कई बार उसको सेक्स के लिए बुलाया पर वो नहीं आयी। अब भी हम दोनों एक ही ऑफिस में हैं। मैं कभी कभी उसको पकड़ के किस करता हूँ तो वो एकदम बहुत गरम हो जाती है। यारो अब पाँच साल के बाद फ़िर मेरा दिल शरण को चोदने को कर रहा है पर वो नहीं मान रही। वो बोलती है किस कर लो, मुम्मे चूस लो और जो मर्ज़ी कर लो पर चूत मारने को नहीं दूँगी। अब मैं उसको कैसे अपनी गिरफ्त में लूँ, अपने सुझाव मुझे लिख भेजो :

rks17@rediffmail.com

मैं और मेरी भाभी गर्लफ़्रेन्ड

March 7th, 2009
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हाय दोस्तों !

पता नहीं लोगों को चार पांच बार नई नवेली चुदाई करने को मिल जाती है, पर मैंने तो एक बार में भी शायद देर कर दी।

मेरी कहानी ऐसी है कि मैं शायद कभी लोगों को समझ नहीं पाया खासकर लेडीज को, पता ही नहीं लगता कि उन्हें कब चुदना है कब नहीं? मेरी कहानी कुछ ऐसी है।

मैं बहुत ही सेक्सी किस्म का इन्सान हूँ, अक्सर सेक्स के बारे में सोचता रहता हूँ।

एक दिन मेरे भाई (सगा नहीं) की बीवी से मुलाकात हुई तो उन्होंने कहा कि आप बड़े मज़ाकिये हो। फिर उसने मेरा नम्बर ले लिया। उसके एक सप्ताह बाद उसने हमारे फर्म से काम करना शुरू कर दिया। मेरा फर्म कंप्यूटर डील करता है इसलिए जब भाई घर पर नहीं होते थे वो मुझे घर पे फ़ोन करके बुलाती और कहती कि उनके कंप्यूटर में कुछ प्रॉब्लम है इसलिए सर्विस के लिए मुझे जाना ही पड़ता था। वो मेरे करीब बैठ जाती थी लेकिन कभी भी ग़लत हरकत नहीं की।

उसके बाद जब उसे लगा कि मैं कुछ समझ नहीं पा रहा हूँ, तो उसने खुलकर आई लव यू ! भी बोल दिया लेकिन मैं समझ नहीं पाया फिर उसने मुझे कई बार बाहर घूमने के लिए बुलाया और मैं भी चला गया। फिर वो मेरे बगल में सटकर बैठ जाती और बातें करती। कहती कि उसका मन मेरे बिना नहीं लगता। मैंने भी कह दिया कि वो मुझे अच्छी लगती है।

फिर एक दिन जब हम अकेले बैठे थे तो मैंने उसकी ब्रेस्ट को छू लिया क्योंकि हम पार्क में थे इसलिए मैं उसके कपड़े नहीं उतार सका, फिर २ मिनट बाद वो चलने को कहने लगी और हम चल दिए।

अगले दिन उसने फिर से मिलने के लिए बुलाया और हम पार्क पहुँच गए। थोड़ी देर इधर -उधर की बात के बाद मैंने उसे छूने की इच्छा जाहिर की और वो बोली इधर बहुत भीड़ है। हम एक कोने में चले गए, वहां उसने धीरे से कहा अब छू सकते हो!

मैंने कहा- क्या?

तो बोली- कुछ नहीं !

फिर मैंने उसे पकड़ लिया और उसके होंठ चूमने लगा। वो भी मजे ले रही थी तभी उधर से कोई आदमी के आने की आहट हुई और हम दूर दूर हो गए। वो डर गई और घर चलने को कहा। हम घर आ गए वहां कोई नहीं था पर जब मैंने उसे छूना चाहा तो उसने मुझे मना कर दिया और डांटने लगी, कहने लगी- आप बड़े बदतमीज़ हैं। और मैं घर चला गया।

फिर ८-१० दिन बाद उसने फिर से मिलने के लिए बुलाया। क्योंकि उसके घर में नॉन-वेज़ नही बनता था इसलिए उसने मुझे लंच के लिए मुझे एक होटल में बुलाया और मैं गया। फिर उसने कहा- चलो एक कमरा लेते हैं और कुछ देर बैठते है।

पर मैंने मना कर दिया क्योंकि मेरे पास १००० रुपये नहीं थे, कमरे का किराया ८०० रुपये था। इसलिए मैंने कहा कि मेरे पास समय नहीं है और जल्दी ऑफिस जाना है। फिर वो मुझे एक कपड़े की दुकान में ले गई, मेरे लिए शर्ट खरीदी, मुझे गिफ्ट किया और मुझे ट्राई रूम के अन्दर बुलाने लगी। पर दुकान में भीड़ होने के कारण मैंने मना कर दिया। फिर उसको घर छोड़ आया।

फिर उसके घर पर बहुत बार मिले लेकिन उसने मुझे छूने भी नहीं देती दिया। एक दिन वो कहीं बाहर जा रही थी तो मुझे स्टेशन पर छोड़ने के लिए बुलाया और जब गाड़ी आई तो बिछड़ते हुए उसकी आंखों में आंसू आ गए। मैं सोच में पड़ गया कि वो मुझसे कितना प्यार करती है ! पर उसके बाद वो आई और मुझसे दूर रहने लगी। एक टूर पर पूरे परिवार के साथ गई और मुझे घर पर रहने को कहा। वो चली गई मुझे लगा कि वो मुझे फ़ोन करेगी पर उसने नहीं किया। फिर वो वापिस आ गई और मुझसे दूर रहने लगी। मेरे समझ में नहीं आ रहा था कुछ भी।

फिर एक दिन पता लगा कि वो मेरे ऑफिस के एक स्मार्ट लड़के जो कि मुझसे लंबा और स्वस्थ था उससे बात करने लगी थी। इसी बीच मेरा तबादला ७ किलोमीटर दूर वाली दुकान में हो गया था और वो दोनों खूब मिलने लगे। मुझे बहुत बुरा लगा क्योंकि मैं शायद उससे प्यार करने लगा था और उसके साथ सेक्स भी करना चाहता था, पर शायद देर हो चुकी थी।

उसने मुझसे मिलने से मना कर दिया जिसकी वजह से हम दोनों में खूब झगड़े हुए और वो मुझसे और दूर हो गई। अब न मैं उससे फ़ोन करता न वो मुझे। इसी बीच मेरी जिंदगी में एक लड़की आ गई जिस कारण मैं उससे आसानी से दूर हो सका।

आज फिर से उसने मुझे फ़ोन किया और मैं फिर से उलझन में हूँ।

जब मैंने उसकी कोख भरी

March 7th, 2009
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प्रेषक : अमित गुप्ता

मेरा नाम अमित है। मैं २४ साल का कालबोय हूँ। मेरे लंड का साइज ८”, मोटाई ३” है। मैं आपको अपनी एक सच्ची कहानी सुनाने जा रहा हूँ।

एक बार मुझे एक मेल मिली। जिसमे एक महिला ने अपना फ़ोन नम्बर दिया हुआ था। मैंने उस नम्बर पर सम्पर्क किया तो उधर से एक भारी सी आवाज सुनाई दी। मैंने उसको अपने बारे में बताया तो उसने मुझे रात को आठ बजे आने को कहा। वो अम्बाला कैंट में रहती थी।

मैं रात को ठीक आठ बजे तैयार होकर उसके घर के सामने था। ऐसे तो मैंने कईयो को चोदा है पर जब भी किसी औरत का फ़ोन आता तो मैं रोमांचित हो जाता हूँ।

मैं उसके घर पहुंचा तो दरवाजा उसी ने ही खोला। वो मुझे सीधे अपने बैडरूम में ले गई और मुझे वहाँ बिठा कर ख़ुद रसोई में चली गई। जब वो वापस आई तो उसके हाथ में चाय के दो कप थे। वो मुझे चाय देकर मेरे पास में ही बैठ गई।

वो मुझे बड़े ध्यान से देख रही थी। वो ३७ – ३८ साल की ठीक ठाक सी औरत थी।

हमने बातें शुरू की तो उसने मुझे बताया कि उसकी किसी सहेली ने ही उसे मेरा पता दिया था जिसे मैंने पिछले महीने चोदा था। उसका पति ज्यादातर बाहर ही रहता है जिससे वो अपनी इच्छाओं को पूरा नहीं कर पाती थी। उसके कोई बच्चा भी नहीं था जिससे वो और भी ज्यादा उदास रहती थी।

मैं उसके थोड़ा नजदीक गया। मैंने उसके चूचों पर हाथ रखा। इस उमर में भी उसके चुचे टाइट थे मैंने उनको दबाना शुरू कर दिया। वो आह !शी !शी आह ! कर रही थी।

वो मेरे और करीब आ गई और उसने मुझे अपनी बांहों में भर लिया। मैंने उसके होठों को चूसना शुरू कर दिया। वो इसमें मेरा साथ देने लगी। वो मुझे जोर जोर से किस करने लगी जैसे कई सालों से प्यासी हो। वो मेरे होंठों को जोर जोर से चूस रही थी। मैंने उसकी साड़ी को निकाल दिया और उसकी ब्लाऊज़ को उससे अलग कर दिया। उसने ब्रा नहीं डाली थी। उसकी भारी भारी चुचियाँ अब आजाद थी और मैं उनसे खेलना लगा।

मैंने अपने होठो को उसकी निपल पर फिरना शुरू कर दिया उसने जोर से मेरा सर पकड़ लिया। मैं उसकी चूची को चूस रहा था। वो आहें भर रही थी उसका हाथ कभी कभी मेरी जांघों तक चला जाता था। मैंने अपनी चैन खोली और अपना लंड उसके हाथ में पकड़ा दिया वो उससे खेलने लगी।

मैंने अपना हाथ उसकी दोनों टांगो के बीच में डाला। मुझे ऐसा लगा जैसे मैंने अपना हाथ भट्टी पर रख दिया हो। मैंने अपनी ऊँगली उसकी चूत में डाल दी। वो आह करने लगी। उसकी चूत टाइट थी। बिल्कुल नई लड़की की तरह। मैं उसकी चूत में उँगली जोर जोर से घुमाने लगा। उसे मजा आ रहा था।

मैंने उसका सर पकड़ा और नीचे ले गया। एक बार तो उसने मना किया पर दूसरी बार कहने पर मेरा लंड उसने अपने मुँह में ले लिया, वो उसे पहले धीरे धीरे चूम रही पर अब वो उसे अच्छे से चूस रही थी उसको उसमें मजा आने लगा था।

मैंने करवट बदली, उसका सर मेरे पैरों की तरफ़ और मैं उसके पैरों की तरफ़ था यानी मेरा सर उसकी चूत पर और मेरा लंड उसके मुँह पर। मैंने उसकी टांगो को फ़ैलाया और अपना मुंह उसकी चूत पर रख दिया। उसने कस कर मेरे चूतडों को अपनी बांहों में भर लिया। मैंने उसकी चूत को चाटना शुरू किया। वो आह आह सी….. आह कर रही थी उसको मजा आ रहा था वो मेरे लंड को जोर जोर से चूस रही थी।

वो गरम हो चुकी थी वो मुझसे बोली कि अब और मत सताओ और अपना लंड मेरी चूत में डाल दो। मैं अभी और मजा लेना चाहता था पर उसके बार बार कहने पर मैं उसकी टांगो के बीच में बैठ गया। मैंने उसकी दोनों टांगे ऊपर उठाई और उसकी गांड के नीचे तकिया दिया। मैं अपने लंड पर निरोध लगाने लगा पर उसने मना कर दिया। कहने लगी शायद आप से ही मेरी कोख भर जाए।

मैंने अपना लंड उसकी चूत पर रख थोड़ा जोर लगाया। पर चूत टाइट होने के कारण अन्दर जाने में दिक्कत हो रही थी। मैंने अबकी बार थोड़ा सैट करके जोर लगा तो मेरा लंड थोड़ा अन्दर चला गया।

पर वो चिल्लाई,”प्लीज आराम से करो दर्द हो रहा है”

मैंने कहा, ”ठीक है पर थोड़ा तो सहना पड़ेगा”

उसने गर्दन हिलाई। मैंने उसकी टांगों थोड़ा और ऊपर उठा कर जोर लगाया तो मेरा आधा लंड उसकी चूत में समां गया। मैंने फ़िर से धक्का लगाया और पूरा लंड उसकी चूत में डाल दिया और धक्के लगाने शुरू कर दिए।

वो बोले जा रही थी ” प्लीज आराम से करो, दर्द हो रहा है”

पर मैं अपनी मस्ती में धक्के लगा रहा था। अब वो भी मेरा साथ दे रही थी, बोल रही थी ” अमित मेरी चूत को जरा और जोर से चोदो, आज बहुत दिनों के बाद इसकी प्यास बुझी है”

मैं जोर जोर से धक्के लगाये जा रहा था और वो बोले जा रही थी- और जोर से चोदो अमित और जोर से।

वो बोली- अमित जोर से करो मैं झड़ने वाली हूँ।

मैंने अपनी स्पीड बढ़ा दी, वो झड़ चुकी थी पर मेरा अभी बाकी था, मैं लगा हुआ था।

४० मिनट के बाद मुझे लगा कि मेरा भी होने वाला है और चार पाँच धक्कों के बाद मैं उसके ऊपर गिर पड़ा उसने मुझे जोर से अपनी बाहों में भर लिया। हम कुछ देर इसी तरह पड़े रहे फिर अलग हो गए।

इसके बाद हमने एक दूसरे को साफ़ किया उसने मेरा चाट कर और मैंने उसकी चाट कर।

फिर हमने खाना खाया जो उसने पहले ही बना कर रखा हुआ था।

और इस तरह उस रात हमने चार बार मजा लिया। सुबह उसने मुझे मेरे फीस के पैसे दिए और मैं चला आया।

इसके बाद उसने मुझे सात आठ बार बुलाया। अब वो एक बच्चे की माँ बनने वाली है। जिसके लिए वो मेरा अहसान मानती है।

मेरी कहानी कैसी लगी बताना।

jogimast@yahoo।in

दिल्ली काल बोय की चुदाई-३

March 7th, 2009
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प्रेषक : लक्ष्य भारद्वाज़

दोस्तो ! मैं लक्ष्य ! एक कालबोय दिल्ली से !

आपने मेरे पिछले अनुभव पढ़े होंगे।

अभी तीन दिन पहले मैं अपनी एक ग्राहक की सेवा करके घर आया और अपनी डाक देख रहा था कि मेरे मोबाईल पर मेरी ग्रेटर कैलाश वाली ग्राहक का फ़ोन आया और उसने बताया कि उसकी एक सहेली को मेरी सेवाएँ चाहिएँ, उसने मुझे अगले दिन अपने घर बुलाया।

अगले दिन मैं दोपहर तीन बजे उसके घर पहुँचा तो उसने ही दरवाज़ा खोला और मुझे अन्दर बुला लिया। मैंने देखा कि ड्राईंगरूम में एक और स्मार्ट औरत बैठी थी जिसकी उमर लगभग ३५ साल होगी।

फ़िर मेरी ग्राहक ने उन्हें मुझसे मिलवाया तो उन्होंने कहा- देखने में तो हैंडसम हो।

तो मैंने मुस्कुराते हुए कहा- काम में भी हैंडसम हूँ। तो उसने कहा अभी देखते हैं कितने हैंडसम हो।

फ़िर हम इधर -उधर की बातें करने लगे तभी मेरी ग्राहक बियर और ग्लास और स्नैक ले आई। फ़िर हमने बियर पीनी शुरू की तो वो लेडी सोफे पर मेरे पास आ कर बैठ गई मैं उसकी टांगों को सहलाता रहा। फ़िर बियर ख़तम होते ही उसने कहा- कि चलो तुम्हारी परीक्षा लेती हूँ ! और मुझे लेकर बेडरूम में आ गई और मेरी शर्ट उतारने लगी तो मैंने भी उसके ब्लाउज़ के हुक खोल कर उतार दिया और साड़ी भी उतार दी, तो मैंने देखा उसके शरीर की आकृति काफी शानदार थी ३२ -३८ -३६। मैंने उसकी ब्रा उतार कर उसके भूरे चूचुक को जीभ से चाटा तो उसकी सांसे भारी होने लगी और मेरे बालों में हाथ फिराने लगी और फ़िर मैंने अपनी जींस भी उतार दी। अब मैं भी केवल फ्रेंची में था। उसने फ्रेन्ची में हाथ डाल कर मेरे ७ इंच लंबे लंड को मुठी में भर लिया और सहलाने लगी और बोली काफी शानदार लौड़ा है तुम्हारा !

तो मैंने कहा- अभी इसका काम देखना फ़िर बताना।

वो नीचे झुकी और लिंग-मुंड पर अपनी जीभ से चाटने लगी। मैं उसकी चूत में दो उंगली डालकर हिलाने लगा तो उसके मुंह से आवाजें निकलने लगी आ आ अह ह्ह्ह्छ हा अहह आ आ आह हह ऊ ओ ऊह ह्ह्ह्ह्छ एस फास्ट आ आ आः ह्ह्ह ह्ह्छ !

फ़िर मैंने तेजी से हाथ चलने लगा तो वो डिस्चार्ज हो गई और बेड पर लेट गई। मैंने उसके चूचुक को चूसना और दबाना जारी रखा। वो फ़िर गरम हो गई और बोली- अब आ जाओ !

तो मैंने उसकी टांगों को अपने कंधे पर रखा और उसकी गांड के नीचे तकिया लगा दिया, जिससे उसकी चूत काफी टाइट होने लगी और मैंने कंडोम लगाकर अपना लंड उसकी चूत में डालना शुरू किया तो वो कहने लगी- धीरे डालो काफी दिन बाद चुदवा रही हूँ !

मैंने अपना लंड निकाला और उसकी चूत पर क्रीम लगाकर अन्दर डाला तो अब आराम से चला गया। वो सिसकियाँ भरने लगी- आ आया आः ह्ह्ह ओह हो ओ ऊ ओह !

फ़िर मैं उसकी शिशिनिका को मसलने लगा, स्तनों को चूसने लगा और धक्के लगाना शुरू किया तो वो ५ मिनट में ही फिर से डिस्चार्ज हो गई, पर मैं तेज़ी से धक्के लगाता रहा। करीब २० मिनट के बाद वो फ़िर से डिस्चार्ज हो गई और कहने लगी- बस अब और मत करो !

तभी मेरी पुरानी वाली ग्राहक भी कमरे में आ गई और नजारा देख कर गरम हो गई और अपने कपड़े उतार कर बोली- अब मेरे साथ आ जाओ !

मैंने अपना लंड उस की चूत से निकला और कंडोम बदल कर के अपनी ग्राहक के पास आ गया और उसके स्तन चूसने लगा। जब वो गरम हो गई तो मैंने उसे कुतिया की तरह किया और चोदने लगा। करीब २० मिनट तक करने के बाद मैं डिस्चार्ज होने वाला था तो मैंने उसे बताया, तब तक वो भी २ बार डिस्चार्ज हो चुकी थी तो उसने कहा करते रहो और मैं तेजी से शॉट्स लगाता रहा और उसे कमर से कस कर पकड़ कर डिस्चार्ज हो गया। फ़िर कंडोम निकाला तो उसकी सहेली आई और मेरे लंड को मुंह में लेकर चूसने लगी और चाटने के बाद बोली- आज कई महीनो के बाद मैं संतुष्ट हो सकी हूँ।

मैंने कहा यह तो मेरा काम है कि अपने ग्राहक को संतुष्ट करो !फ़िर मैंने अपने कपड़े पहने और मेरी ग्रेटर कैलाश वाली ग्राहक ने ६००० रुपये मेरी फीस दी और फ़िर मैंने उन दोनों को किस की और आ गया।

lovebug2449@yahoo.com

मेरा राज़

March 7th, 2009
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प्रेषक : जो हन्टर, कामिनी सक्सेना

मैं संजय के साथ आज डांस क्लब में डिनर पर आई थी। स्टेज पर डांस चल रहा था। संजय और मैं रिजर्व टेबल पर बैठ गये थे। बैरा ड्रिन्क लाकर रख गया था… मैने अपने लिये गोवा का मशहूर जिंजर वाईन मंगवाया था। हम दोनों भी उस माहौल में धीरे धीरे रंगने लगे थे। थोड़ी देर में सन्जय मेरे साथ डांस फ़्लोर पर था। हल्का नशा था … डांस में मजा भी आ रहा था … मैं भी अपने डांस को सेक्सी बनाने लगी। अपनी चूंचियां उछाल उछाल कर सन्जय को रिझाने लगी। इतने में मुझे राज अकेला नाचता हुआ नजर आ गया। मैं चौंक पडी ! ये आज यहां कैसे? तुरन्त मेरे तेज दिमाग में एक प्लान उभर आया।

मैने सन्जय से कहा,”सन्जू… वो राज है, मेरे पुराने मिलने वालों में से है ! तुम रेस्ट करो ! मैं उस से मिल कर आती हूं !” संजय वैसे भी ड्रिन्क करना चाहता था। सो वह अपनी टेबल पर चला गया। मेरे दिल में राज को देखते ही हलचल मच गयी थी। मैं डांस करती हुयी राज के पास आ गयी। मुझे देखते ही वो चौंक गया,”अरे रोज़ी तुम ! कैसी हो ?”

“हाय राज ! तुम बताओ शीना की डेथ के बाद अब मिले हो !”

राज़ सकपका गया। शीना मेरी गहरी सहेली थी, उसकी सारी बातें मैं जानती थी, पर राज को ये नहीं पता था कि शीना की कोई हमराज़ भी है।

“हां ! मैं दिल्ली चला गया था, शीना का बिजनेस भी तो सम्हालना था, आज तो तुम बड़ी सेक्सी लग रही हो !”

“ऐ !! इधर से नजरें हटाओ, वर्ना मर ही जाओगे !”मैने उसे अपने स्तनों की तरफ़ इशारा किया, फिर अपनी चूंचीं उछाल दी।

“हाय ! रोज़ी ! सच में, तुम्हारी इसी अदा पर तो मरता हूं !”

मै उसकी कमर में हाथ डाल कर उससे चिपकने लगी। उसने भी मेरे उरोज अपनी छाती से भींच दिये। मुझे लगा राज दिलफ़ेंक तो है ही, जल्दी पट जायेगा !

“आऊच ! क्या करते हो, ये तो नाजुक है, जरा धीरे से !”

राज मचल उठा। उसने धीरे से मेरी चूंचियां दबा दी, हाथ मेरे चूतड़ों की तरफ़ बढ चले।

“मस्त हैं तुम्हारी चूंची तो !”

“अरे! इतनी अच्छी भाषा बोलते हो !” मैने भी उसे बढावा दिया।

“तो फिर हो जाये एक दौर !!” राज़ ने चुदाई की ओर स्पष्ट इशारा किया।

” कैसा दौर ? राज ! साफ़ कहो ना !”

“तुम और मैं ! और मस्ती का दौर !”

“चुप ! अभी सन्जू है, कल दिन को रखते है, मैं सीधे तुम्हारे घर पर ही आ जाऊंगी।” मैने उसे समय दे दिया और मैं जाने लगी। राज मुझे जाने ही नहीं दे रहा था।

जैसे तैसे मैंने उससे पीछा छुड़ाया और सन्जू की टेबल पर आ गयी।

संजय सब समझ चुका था। हमने डिनर लिया और सजय ने मुझे घर छोड़ा फिर अपने घर चला गया।

अगले दिन -

दिन के ग्यारह बज रहे थे। मैने बुर्का पहना और राज के घर चली आयी। राज मुझे देखते ही खुश हो गया।

“मैं फोन करने ही वाला था कि तुम आ गयी।”

“मेरा फोन नम्बर तुम्हरे पास है क्या”

“नहीं ! पहले तुम्हारी सहेली को करता उस से नम्बर ले लेता।” मैने चैन की सांस ली और बुर्का उतार दिया।

राज ने मुझे खींच कर अपने से चिपका लिया और मुझे चूमने लगा।

“राज पहले ड्रिंक, फिर मजे करेंगे।”

“ओके ! तुम्हारे लिये क्या बनाऊं? हार्ड या बीयर ?”

“नहीं बस तुम पियो !”

“ये हाथ के मोजे तो उतार दो !”

“नहीं !हाथ जल गया था !” उसने ड्रिंक लेनी शुरु कर दी, मैं उसके पास ही बैठ गयी। अब वो धीरे धीरे मेरे जिस्म से खेलने लगा। मुझे भी रंग चढने लगा. मैंने उसे चूमना चालू कर दिया। उसने भी जवाबी हमला बोल दिया। उसने सीधे मेरी चून्चियो को दबा डाला। मुझे एकदम से तरन्ग आ गयी। मैने अपने बोबे उसके सामने तान दिये, वो मेरे दोनो उरोज पकड़ कर दबाने लगा। मैं अपनो उरोजो को और आगे उभार कर उसके हाथों पर जोर डालने लगी। ऐसे मुझे और भी मजा आने लगा।

“दबा मेरे राज, ये ले मेरी कड़क चूंचिया, मसल दे हरामी को !”

“मेरी रोज़ी तू तो बड़ी सेक्सी बातें करती है !” उसने पूरा गिलास एक झटके में पी लिया, मैने दूसरा गिलास बना दिया।

“राज आज मेरे मन की निकाल दे, शीना को तो तूने खूब चोदा है, मुझे क्यों छोड़ दिया था रे !!”

“मेरी जान अब चुद लो, शीना के होते हुये तुझे कैसे चोद सकता था?”

मै अब खड़ी हो गयी, और अपने गोल गोल चूतड़ उसके चेहरे के सामने कर दिये।

“राज इन नरम नरम चूतड़ों को भी मसल दो ना, साले बहुत बेताब हो रहे हैं!”

राज मेरे चूतड़ देख कर उतावला हो उठा। उसने अपना गिलास एक बार में खाली कर दिया। और मेरे चूतड़ों को जोर जोर से दबाने लगा। मैने अपने चूतड़ और फ़ैला दिये और उसकी ओर निकाल दिये। मैने उसका गिलास फिर से एक बार और भर दिया। राज़ ने मेरी सफ़ेद पैन्ट नीचे उतार दी और मुझे नन्गी कर दिया। मैने शर्माने का नाटक किया,”हाय मेरे राज ! मेरी चूत दिख रही है छिपा लो इसे !!”

उसने तुरन्त उपने होन्ठ मेरी चूत से चिपका दिये। मेरे मुख से आह निकल गयी। मैने अपनी पैन्ट नीचे से पूरी उतार दी। फिर अपना टोप भी उतार दिया। अपनी चूत को मैं अब जोर लगा कर उसके होंठो से रगड़ मार रही थी। मेरे शरीर मे वासना भरती जा रही थी। मुझे मीठी मीठी सी सिरहन होने लगी थी। अब राज़ अपनी जीभ से मेरा दाना चाट रहा था, मेरी चूत फ़ड़क उठी, मैं अपनी चूत उसके मुख पर मारने लगी। फिर जोर लगा कर उसके होठों से रगड़ने लगी। अब मेरी चूत काफ़ी पानी छोड़ चुकी थी। मैने अपनी चूत दूर करके अब उससे चिपक कर बैठ गयी।

उसका लन्ड पैन्ट से बाहर निकलने को जोर मार रहा था। मैने उसकी ज़िप खोल कर उसका लन्ड बाहर निकाल लिया। बाहर आते ही जैसे उसके लन्ड ने राहत की सांस ली। फ़नफ़नाता हुआ सांप की तरह खड़ा हो गया, मैने प्यार से उसे पकड़ कर सहला दिया और उसे अपनी मुट्ठी में भर कर हौले से ऊपर नीचे करने लगी। राज़ मदहोश होता जा रहा था, मैने उसकी पैन्ट नीचे खींच कर उतार दी। ऊपर के कपड़े उसने स्वय ही उतार दिये। वो नशे में झूम रहा था, मैने उसके लन्ड दो अब खींचना और मसलना भी चालू कर दिया था। उसकी हालत बेकाबू होती जा रही थी।

“अरे मादरचोद! रन्डी… अब तो मेरा लन्ड चूत में घुसेड़ ले !”

“मेरे राजा अभी रूको तो ! तेरे लन्ड की मां तो चोदने दे !”

“हाय मेरी रानी ! तू कितना मस्त बोलती है रे! घिस दे इस हरामी को!”

मुझे लगा कि थोड़ा और घिसने से ये तो झड़ जायेगा। उसके लन्ड को झूमते देख कर मुझे भी चुदने की लगन लग गयी थी। मैने अपनी चूत का मुंह खोला और उसका कड़कता लन्ड चूत-द्वार पर रख दिया, उसे कहां चैन था, उसने तुरन्त ही नीचे से धक्का मार दिया। उसका लन्ड मेरी चूत में रास्ता बनाता हुआ गहराई में घुसता चला गया। मेरी मुख से कसकती हुयी आह निकल पड़ी।

मैने उसे सोफ़े पर ठीक से एडजस्ट किया और मै ऊपर ही उठने बैठने लगी पर राज़ ने मुझे तुरन्त हटाया और बिस्तर पर ला कर पटक दिया,”अब तेरी चूत का मैं भोसड़ा बनाता हूं ! रूक जा बहन की लौड़ी… !~”

“हाय राजा ! देख छोड़ना मत मेरी चूत को ! इसकी तो मां चोद दे यार ! ”

” रोज़ी … ये ले … यस यस… क्या मस्त चूत है … आऽऽऽऽऽऽह् …”

“है न मस्त …… चिकनी और प्यारी सी… बस फ़ाड़ दे यार… दे धक्का… हाय री…”

“चुद जा …मेरी जान…… ” राज़ और मैं गालियां पर गालियां मस्ती में दिये जा रहे थे…

चूत का पानी और धक्के … फ़च फ़च की आवाजें कमरे में गूंजने लगी। मेरी चूत में अब मीठा मीठा सा दर्द और तेज गुदगुदी उठने लगी। उसके धक्के अब मेरी जान निकाल रहे थे… मेरी उत्तेजना बहुत बढ चुकी थी … मेरी चूत अब पानी छोड़ने को मचल रही थी… मैने अपनी चूत को भींच लिया…… मेरी चरमसीमा आने वाली थी … मेरी चूंचियां राज बेरहमी से खींच रहा था… मसल रहा था … उसके चूतड़ तेजी से उछल रहे थे , उसका लन्ड इंजन के पिस्टन की तरह फ़काफ़क चल रहा था……

अचानक मैं छूट पड़ी…… मेरा पानी निकलने लगा।

“राजा मैं गयी … हाऽऽऽऽय्… मेरी चूत छूट गयी … मेरे बोबे छोड़ दे रे …… बस… अब बस कर …”

“कहां मेरी रानी … अभी तो चूत का भोसड़ा बना ही नहीं है…”

“छोड़ दे … हराम जादे … भोसड़ी के … तेरी मां को घोड़ा चोदे…”

“अरे … मेरी… रन्डी… छिनाल… चुद जा रे… नखरे छोड़ दे…”

उसी समय उसने मुझे जोर से जकड़ लिया… उसका लन्ड मेरी चूत मे गहराई तक गड़ गया……

“मैं गया … मेरा निकला…… माई चोदी रे… ऊऽऽऽऽऽईऽऽऽऽऽऽ…… हाय मेरी मां चुद गयी रे…… ये…ये… हाय निकल गया मेरी जान …” उसने तेजी से लन्ड चूत में से निकाल लिया। उसका वीर्य तेजी से पिचकारी के रूप में मेरे बदन पर बरसने लगा… मैने सारा वीर्य अपने बोबे और पेट पर मल लिया। उसका लन्ड पकड़ कर खींच खींच कर बाकी का वीर्य भी निकाल कर कर अपने शरीर पर मलती गयी। राज मस्ती में लन्ड उछालता रहा। नशा उस पर चढ चुका था… अब वो सुस्त पड़ने लगा……अब वो बिस्तर पर निढाल हो कर लुढक गया। नशा उस पर पूरा चढ चुका था … उसकी आंखे बन्द होने लगी थी…

मैने उसकी हालत देखी वो लगभग नींद में था … मैने तुरन्त ही बिस्तर पर से छलांग मारी और अपने पर्स को खोला… अब एक चमकता बड़ा सा खन्जर मेरे हाथों में था… दूसरे ही क्षण मेरा हाथ बिजली की तरह चला और उसका गरदन का आधा भाग कट गया… उसकी सांस की नली कट चुकी थी… उसकी फ़टी हुयी आंखे मुझे अविश्वाश से देख रही थी…

“ये मेरी शीना की हत्या का बदला है … बड़े खुश थे ना उसकी असीम दौलत पाकर…।”

और मेरे खन्जर का दूसरा वार सीधे उसके दिल पर था… उसकी आंखे फ़टी कि फ़टी रह गयी … मैं वहीं क्रूरता से मुस्कराती रही… उसकी जान जाते देख कर मुझे असीम शांति मिल रही थी … मेरे मन की आग शान्त हो चुकी थी। उसकी लाश अब मेरे सामने पड़ी थी… उसकी आंखे खुली थी… मैंने अपना खन्जर उसी के कपड़े से साफ़ किया… और उसे फिर से पर्स में रख लिया… मैंने अपने कपड़े सोफ़े पर से उठा कर पहन लिये। उसका मोबाईल भी अपने हवाले किया। अपना मेक अप ठीक किया… अपने दस्ताने उतार कर पर्स में रखे और ध्यान से कमरे का निरीक्षण किया… सन्तुष्ट हो कर मैने अपना बुर्का पहना और बाहर झांक कर देखा।

दोपहर का एक बज रहा था … मै चुप से बाहर आ गयी… मैं जल्दी से बाहर आई और पैदल ही एक तरफ़ चल दी… सड़क सूनी पड़ी थी… मै सामान खरीदने एक मोल पर आ गयी… मैने बाहर ही बुर्का उतारा और एक थैले में रख दिया… कुछ सामान खरीद कर बाहर आ गयी। सारा सामान थैली में रख कर बाहर आकर एक टूसीटर कर लिया … रास्ते में नदी के पुल पर से नदी में राज़ का मोबाईल फ़ेन्क कर रास्ते में उतर गयी। वहां से टेक्सी करके घर के पास उतर गयी… और पैदल ही घर की ओर चल दी…

jjoehunter@gmail.com kaminirita@gmail.com

वो बारिश और शिल्पा का साथ

March 7th, 2009
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प्रेषक : इवेन्ट मैनेजर जयपुर

उम्र २३ वर्ष।

हाईट ५’८”

साइज ९”

तो दोस्तों बात उस दिन की है जब बारिश हो रही थी और मैं भीगता हुआ अपने घर की तरफ़ अपनी बाइक पे जा रहा था। शाम के करीब ५:३० का समय था। अचानक मैने देखा कि मेरी तरफ़ कोई लिफ़्ट के लिये कोई हाथ हिला रहा था, गौर से देखा तो वो २५-३० साल की एक युवती थी। मैने बाइक रोकी। वो मेरे पास आके पूछने लगी कि आप कहां जा रहे हो?

मैने कहा-आपको कहां जाना है?

वो रेलवे स्टेशन जाना चाहती थी। मैने कहा कि मैं भी वहीं जा रहा हूं (जबकि मैं अपने घर जा रहा था)। वो मेरे पीछे बैठ गई। मैं बाइक को रफ़्तार से दौड़ाने लगा। उसके मोम्मे मेरी पीठ से सटे हुये थे। मैं गरम हो रहा था। बातों बातों में पता चला कि वो जयपुर में जोब करती है, उस का पति दिल्ली में कोई प्राइवेट जोब करता था और वो अपनी बेटी को लेने के लिये जा रही थी जो आज़ ट्रेन से आने वाली थी।

हम रेलवे स्टेशन पहुँच गये थे, ट्रेन आने में अभी थोड़ा टाइम था, हम कैंटीन में चाय पीने चले गये। कैंटीन में उस ने जैसे ही उस ने अपना रेन कोट उतारा तो मुझे उस की जवानी के दर्शन हुये। गज़ब की खूबसूरती थी उस की। सफ़ेद रंग के टोप में उस की ब्रा भी चमक रही थी सो उसके मोम्मों के साइज़ का अंदाज़ा लगाना कोई मुश्किल नहीं था। एक दम गोरी चिट्टी थी वो।

चाय पीते हुये मैने उसके हुस्न का नज़ारा लिया और खूब बातें भी की। सर्दी के मौसम में उस की गरम जवानी ने मेरे रोम रोम में गरमी भर दी थी और मेरा लण्ड अपने आपे से बाहर हो रहा था।

तभी ट्रेन भी आ गयी। हमने उस की ५ साल की बेटी को साथ लिया और फ़िर मैने उसे कहा- मैं आपके घर तक छोड़ देता हूं।

उस ने मना किया लेकिन मैं जानना चाहता था कि वो कहां रहती है क्योंकि वो मुझे बता चुकी थी कि वो अकेली ही रहती है। मैने दोनो को बाइक पे बैठाया और उस के घर की तरफ़ चल दिया।

उस का घर आते ही बारिश भी तेज़ हो गयी। उस ने मुझे बारिश रुकने तक रुकने के लिये कहा और मैं भी तो यहि चाहता था। मैं पूरी तरह भीग चुका था। उसने कॉफी बनायी और चेंज कर के जब वो मेरे सामने आयी तो ब्लैक सिल्की नाइटी में वो कॉफी से भी ज़्यादा गरम लग रही थी। दिल कर रहा था कि अभी चोद डालूँ साली को।

सफ़र की वजह से उसकी बेटी आते ही सो गयी थी, बारिश रुकने का नाम नही ले रही थी। तभी लाइट भी चली गयी। वो केंडिल लेने के लिये उठी, मैं भी उसकी मदद करने लगा लेकिन केंडिल नहीं मिली। अंधेरे में वो मुझ पर गिर गयी। वाह क्या गरमी थी। उसने उठने की कोशिश की लेकिन मैने उसको अपनी बाहों में भर लिया और छोड़ा ही नहीं, पहले उसने विरोध किया लेकिन वो भी शायद कई दिनो की प्यासी थी तो उसने भी ज़्यादा कोशिश नहीं की।

मैने उसके मोम्मे दबाने शुरु कर दिये, वो गरम हो रही थी। मैने धीरे धीरे अपना एक हाथ उसकी नाइटी उठाते हुये उसकी पैंटी में डाल दिया। वो सिहर उठी। मैने अपना मुँह उस की चूत के पास लाके उस की पैंटी को अलग कर दिया।

उसकी बालों वाली चूत एकदम सेक्सी थी। मैने उसमें अँगुली करनी शुरु कर दी। वो आआआअह कर रही थी। मस्ती उफ़ान पे थी। मेरे दोनो हाथ उसके मोम्मों पे थे। वो आंखें बंद करके मेरा साथ दे रही थी।

जब उस से रहा नहीं गया तो उसने कहा- प्लीज़ अब चोद भी दो, मैं बहुत दिन से प्यासी हूं।

मैने अपनी पैंट उतार दी। मेरा लण्ड देखते ही वो खुश हो गयी। मैने उसकी दोनो टांगों को खोला और फ़िर अपना अंडरवियर।

अपना लण्ड एक ही झटके में उस की चूत में डाल दिया। वो ऊऊऊउह की आवाज़ में मज़ा ले रही थी। अब कमरे में उस की आहें और फ़चाक फ़चाक की आवाज़ें गूंज रही थी।

वो बोली- और ज़ोर से चोदो मुझे, फ़ाड़ डालो मेरी चूत को। यो साली बड़े दिन से लण्ड की भूखी है। आज इस की भूख और मेरी प्यास बुझा दो। चोदो चोदो और ज़ोर से चोदो मुझे।

उसके बोलने के साथ ही मेरी स्पीड भी बढ़ रही थी। ये सिलसिला करीब २५ मिनट चला फ़िर हम दोनो शांत होकर एक दूसरे से लिपट के लेटे रहे।

१० मिनट बाद वो उठी और मेरे लण्ड को अपने हाथ में ले लिया। उसने बड़े प्यार से मेरे लण्ड को कहा- यू आर सो स्वीट और अपने मुँह में डाल लिया। वो लण्ड को ऐसे चूस रही थी कि मानो लोलीपोप चूस रही हो।

मेरा लण्ड दोबारा से चुदाई के लिये तैयार हो गया था। १५ मिनट के बाद मैने उसे घोड़ी बनाया और फ़िर पीछे से उसकी गांड में अपना लण्ड डाल दिया। वो चुद रही थी, मैं चोद रहा था। ये चुदाई सारी रात में ६ बार हुई।

बारिश भी तभी रुकी जब सुबह हुई और उसकी प्यास मैने बुझा दी।

उसके बाद जब भी वो या मैं चाहते तो मिलकर ये चुदाई का खेल खेलते हैं।

आपको मेरी ये कहानी कैसी लगी जरूर बताएँ…

event_manager_jaipur@yahoo.com

कोलेज से जंगल में

March 7th, 2009
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प्रेषिका : पिन्की सेक्सी

हाय मेरा नाम पिंकी है. मेरी उम्र १८ साल है। मैं लखनऊ के पास के गाँव की रहने वाली हूँ। मैंने अन्तर्वासना पर बहुत सी कहानियाँ पढ़ी और सोचा कि मुझे भी अपनी बात सबको बतानी चाहिए। इसलिए आज मैं आपको एक व्यक्तिगत अनुभव सुनाने वाली हूँ।

हमारे गाँव में बहुत से कच्चे मकानों के बीच हमारा मकान पक्का है जिसमें मेरा, मेरे भाई का, मम्मी पापा का सबका अलग अलग कमरा है।

एक रात की बात है, मैं लगभग ११ बजे बाथरूम जाने के लिए उठी। बाथरूम मम्मी के कमरे को पार करने के बाद पड़ता है। जब मैं उस कमरे के सामने से गुज़री तो मुझे मम्मी के कराहने और ज़ोर ज़ोर से सांसें लेने जैसी आवाज़ें सुनाई पड़ी। मैं एक बार को तो डर गई, पर मैंने हिम्मत रखते हुए चाबी के छेद से झांका तो मैं दंग रह गई। कमरे में पापा मम्मी बिल्कुल नंगे खड़े थे। पापा मम्मी की चूचियाँ दबा रहे थे और बार बार उनके चूतड़ों पर जोर से चपत सी मारते जा रहे थे।

पहले तो मेरी समझ में कुछ भी नहीं आया पर फ़िर मैंने ध्यान से देखा कि पापा मम्मी से चिपटे हुए हिल भी रहे थे। तभी वे थोड़ा सा घूमे तो मेरी बुद्धि घूम गई। पापा ने अपना लण्ड शायद मम्मी की चूत में डाल रखा था और वहीं धक्के मार रहे थे। मेरी समझ में कुछ कुछ आने लगा था। मेरी कोलेज़ की सहेली ने एक बार मुझे अपनी चुदाई की कहानी सुनाई थी। आज़ अचानक वही चुदाई मुझे अपने घर में होती दिखाई दी।

पता नहीं क्यों, पर वो नज़ारा देख कर मेरी चूत में खुज़ली सी होने लगी और मुझे अपनी सांसें कुछ भारी सी लगने लगी। मैं वहाँ पर पूरा कार्यक्रम देखकर बाथरूम जाकर अपने कमरे में तो आ गई पर मुझे फ़िर नींद नहीं आई।

वो दृष्य मेरी आंखों के सामने नाचने लगा। मैंने अपनी सलवार और कच्छी उतार दी और एक हाथ से अपनी चूचियाँ दबाते हुए अपने पैन को चूत में डाल कर चलाया। फ़िर पैन के बज़ाए दूसरे हाथ की उँगली डाली। थोड़ी देर बाद मेरी चूत में से कुछ सफ़ेद सा निकला और मुझे पता ही नहीं चला कि कब नींद आ गई।

सुबह मम्मी की आवाज़ ‘ कोलेज़ नहीं जाना है क्या ! जल्दी उठ !’ से मेरी आँख खुली, तो जल्दी से कपड़े पहन कर बाहर आई।

मुझे रात की बात अभी भी याद आ रही थी, पर मैं कोलेज़ जाने के लिए तैयार होने लगी। मैं कच्छी और ब्रा पहन कर ही नहाती हूँ पर उस समय मेरी उत्तेज़ना बढ़ गई और मैं पूरी नंगी होकर नहाई और उँगली, साबुन की सहायता से अपनी चूत का पानी निकाला।

तरोताज़ा होकर, नाश्ता कर मैं कोलेज़ के लिए घर से निकल गई। थोड़ी सी दूर सड़क से बस मिल जाती है, वहीं से मैंने बस पकड़ी जो रोज़ की तरह ठसाठस भरी थी। जैसे तैसे गेट से ऊपर चढ़ कर थोड़ा बीच में आ गई। तो वो रोज़ की कहानी चालू। आप तो जानते ही होंगे, जवान लड़की अगर भीड़ में हो तो लोग कैसे फ़ायदा उठाते हैं, और आप उन्हें कुछ कह भी नहीं सकते।

वही मेरे साथ होता है। मेरे पीछे से कोई मेरे चूतड़ दबाने सा लगा, तो एक अन्कल मेरे कन्धे पर बार बार हाथ रख कर खुश होने लगे। एक महाशय सीट पर बैठे थे, भीड़ की वज़ह से मेरी साईड उनके सिर से दबी थी, जो उन्हें भी मज़ा दे रही होगी।

इतने में मेरी ही क्लास का एक लड़का जो बहुत दिन से मेरे पीछे पड़ा था और केवल मेरे लिए ही इस बस से आता-जाता था, अपने गाँव से बस में चढ़ा। लन्बा तगड़ा तो खैर वो है ही, हैण्डसम भी है। पर मैं उसे ज्यादा भाव नहीं देती थी। आज़ तो वो सबको हटाता हुआ ठीक मेरे पीछे आकर खड़ा हो गया। मैंने उसे देखा पर मैं कोई आपत्ति करने की स्थिति में नहीं थी। कुछ कहा तो बोला- बस में भीड़ ही इतनी है।

मुझे चुप हो जाना पड़ा। मुश्किल से पाँच मिनट बीते होंगे कि अचानक ड्राईवर ने बड़े जोर से ब्रेक लगाए और पता नहीं क्यों ड्राईवर मादरचोद, बहनचोद जैसी माँ बहन की गालियाँ किसी को बकने लगा। शायद कोई बस के आगे आ गया होगा।

लेकिन उसके अचानक ब्रेक मारने से थोड़ सा बैलैंस तो सबका बिगड़ ही गया था। जितेन्द्र, मेरा क्लासमेट गिरते गिरते बचा। उसके हाथ में मेरी दाईं चूची आ गई थी, या वो जानबूझ कर उसे पकड़ कर लटका। पर इतना जरूर हुआ कि उसने उसे कायदे से दबा मसल जरूर दिया। मुझे गुस्सा आया, पर मैं कुछ कहती, उससे पहले ही वो वैरी सोरी कहने लगा। तो मुझे भी लगा कि शायद अनायास ही यह हो गया होगा।

वो फ़िर मेरे से सट कर खड़ा हो गया। बस चलने लगी। इतने में मैंने अपने चूतड़ों के बीच अपनी गाण्ड में कुछ चुभता सा दबाव महसूस किया। पहले तो मैंने इस पर खास ध्यान नहीं दिया अप्र मैं समझ गई कि जितेन्द्र का लण्ड मेरे चूतड़ों की गरमी खा कर खड़ा हो गया है और वो ही मुझे चुभ रहा है। यह सोच कर मुझे रात वाला नज़ारा फ़िर याद आ गया और मेरे बदन में झुरझुरी सी दौड़ गई। अब मैं बिल्कुल बिना हिले कपड़ों के ऊपर से ही अपनी गाण्ड का तिया-पाँचा कराने लगी।

कुछ देर बाद ही कोलेज़ जाने वली सड़क पर बस रुकी और कोलेज़ जाने वाले सभी लोग उतरने लगे। मैं और जितेन्द्र साथ साथ ही उतरे। उतरने के बाद भी आज़ तो वो मेरे साथ ही चलने लगा। कुछ मिनटों बाद मैंने उससे मुस्कुरा कर कह ही दिया कि आप जो बस में कर रहे थे, वो अच्छी बात नहीं है। इस पर वो नाटक करते हुए बोला कि मैंने तो कुछ नहीं किया और कहते कहते ही मेरे चूतड़ों को भी दबाने लगा। मुझे भी अच्छा सा लगा पर मैंने उससे कुछ नहीं कहा।

अचानक ही हम कोलेज़ जाने वाले मोड़ से कोलेज़ की बजाए जंगल वाली सड़क पर मुड़ गए। शुरू में तो मुझे मज़े मज़े में पता ही नहीं चला पर थोड़ी देर बाद मैंने उससे कहा तो बोला- कोलेज़ में तो रोज़ ही जाते हैं, चलो आज एक नया नज़ारा दिखाता हूँ।

उसकी बात का मतलब समझते हुए भी मैं उसके साथ चलने लगी, सच में तो मुझे रात से लग रहा था कि कोई मेरी चूत को चोद डाले, जैसे पापा मम्मी को चोद कर मज़ा दे रहे थे।

एक जगह बिल्कुल सुनसान थी। दूर दूर तक कोई भी दिखाई नहीं दे रहा था। तभी हमें गन्ने के खेत के बीच में कुछ खाली हिस्सा नज़र आया। वो मुझे वहीं ले गया और मुझसे लिपट कर जगह जगह मुझे चूमने चाटने लगा। इससे मेरी उत्तेज़ना और बढ़ गई। इसके बाद जब उसने मेरी चूचियों को दबाना-मसलना शुरू किया तो मुझे जैसे ज़न्नत दिखाई देने लगी। वो एक हाथ से मेरी चूचियां और दूसरे हाथ से मेरे चूतड़ों को बारी बारी दबा रहा था।

अचानक उसने मेरे कपड़े उतारने शुरू कर दिए। मैं मना करने की स्थिति में नहीं थी, सो मैंने हाथ ऊपर कर दिए ताकि वो मेरा कुर्ता आराम से उतार सके। उसने मेरी सलवार का नाड़ा भी खींच दिया। सलवार बिना लगाम के घोड़े की तरह झट से नीचे गिर गई। अब मैं उसके सामने केवल ब्रा और पैन्टी में रह गई थी।

मुझे शर्म तो आ रही थी लेकिन उत्तेज़ना शर्म पर हावी हो गई थी। सो मैं चुपचाप तमाशा देखती रही। उसने पहले तो मेरे सीने को फ़िर नाभि को ऐसे चूसना शुरू कर दिया मानो कुछ मीठा उस पर गिरा हो और वो उसे चाट कर साफ़ कर रहा हो। मैं बुरी तरह उत्तेज़ित हो रही थी कि उसने मेरी कच्छी के ऊपर से एक उँगली मेरी चूत में घुसेड़नी शुरू कर दी। मुझे दर्द का भी अहसास हुआ पर मैं उसे मना ना कर सकी। पता नहीं मुझे क्या हो गया था लेकिन मैं बेशर्म हो कर अपनी चूचियाँ अपने आप दबाने लगी थी।

उसने धीरे धीरे मेरी पैन्टी और ब्रा को भी मेरे शरीर से अलग कर दिया और मुझे मादरजात नंगी कर दिया। मैं तड़प रही थी और उसे मज़ा आ रहा था।

वो अभी तक पूरे कपड़ो में खड़ा था। मुझे गुस्सा आया और मैंने उसे गाली दे देकर कहना शुरू कर दिया कि अपने कपड़े भी तो उतार। वो झटके से मुझसे अलग हुआ और बिजली की रफ्तार से उसने अपने कपड़े उतार दिये। कच्छा उतारते के साथ मेरी हालत खराब हो गयी। उसका लण्ड मेरे पापा के लण्ड से कम से कम दुगुना लग रहा था। उसकी लम्बाई कम से कम ८ इंच और गोलाई कम से कम ३ इंच से तो किसी भी तरह कम नहीं थी।

उसने अपना हथियार मेरे हाथ में देकर मुझसे सहलाने को कहा। मैं उसे हाथ में लेकर आगे पीछे करने लगी तो उससे डर कुछ कम लगने लगा। फिर उसने मुझे नीचे बैठाया और अपना लण्ड मेरे मुँह में देने लगा। मुझे बहुत घिन्न आ रही थी कि इसी से ये मूतता होगा और अपना पेशाब मुझे पिलाने की तैयारी में है और सच में उसने मेरे मुँह में डालते डालते पेशाब की तेज धार मेरे मुँह और सारे चेहरे पर डाल दी और हंसने लगा।

पहले तो मुझे बहुत घिन्न आयी पर पता नहीं क्यों कैसे मुझे अपने ऊपर पड़ती गर्म पेशाब से अचानक नहाने में बड़ी उत्तेजना का अनुभव होने लगा। मैं उसके पेशाब को चाटने भी लगी और अपनी चुचियों पर भी मला। मुझे सच इसमें बहुत मजा आया। इसके बाद लण्ड में बची बूंदो को खराब न जाने देने के इरादे से मैने उसका मोटा लण्ड अपने मुँह में बिना उसके कहे डाल लिया और चूसने लगी।

मुझे तो खैर उसमें बहुत मजा आ ही रहा था, मैने महसूस किया कि उसे भी इसमें बहुत मजा आया होगा क्योंकि उसका लण्ड पहले से अधिक सख्त और गर्म महसूस हो रहा था। वो मेरा सिर पकड़ कर आगे पीछे करने लगा। अब मेरी चूत में उत्तेजना बढती जा रही थी। यह बात मैने पूरी बेशर्मी से उसको बतायी तो वो अपना लण्ड मेरी चूत में डालने को तैयार हो गया। वो मुझे जमीन पर लिटाकर मेरे उपर आ गया।

उसके लण्ड का अगला भाग जिसे शायद सुपाड़ा कहते हैं जैसे ही मेरी चूत से टकराया लगा कि जैसे गर्म सरिया या रॉड सी मेरी चूत पर छुआ दी हो। सच अगर चूत में लण्ड डलवाने की इतनी खुजली न मची होती तो मैं तुरन्त उसे वहां से हटा देती, लेकिन मैं अपनी चूत के हाथो मजबूर थी। अब उसने चूत पर लण्ड का दबाब बढ़ाना शुरू किया। मुझे दर्द का एहसास हुआ तो मैने थूक लगाकर डालने की सलाह दी जिसे उसने तुरन्त मान लिया।

उसने सुपाड़े पर थूक लगाकर जोर का झटका मेरी चूत के छेद पर मारा, पर निशाना मिस हो गया और लण्ड मेरे पेट के निचले हिस्से की खाल को जैसे चीरता हुआ उपर आया। मैने उसे अपने पर्स में निकालकर अपनी कोल्ड क्रीम की ट्यूब उसे दी और उसके लण्ड पर लगाने को कहा, अबके उसने लण्ड के साथ साथ मेरी चूत को भी क्रीम से भर दिया, उँगली डाल डाल कर क्रीम अन्दर पहुँचा दी। मेरी हालत प्रति क्षण खराब होती जा रही थी।

मैने उससे कहा कि मैं रास्ता दिखाती हूँ तुम जोर का धक्का मारो।

फिर मैने उसका लण्ड पकड़ कर अपनी चूत के छेद पर रखा और दबाया। इशारा समझकर उसने शायद पूरी ताकत से धक्का मार दिया। उस समय ऐसा लगा कि उसने धक्का नहीं मुझे मार दिया। एक झटके में उसका आधे से ज्यादा महालण्ड मेरी चूत में समा गया था। मेरी चूत निश्चित ही फट गयी थी और वह दर्द का अहसास हुआ जो आज तक कभी भी जिन्दगी में नहीं हुआ। मैं सिर पटकने लगी।

सारी उत्तेजना जाने कहाँ हवा हो गयी थी, मैं उससे लण्ड निकालने की रो-रोकर विनती करने लगी, लेकिन उसे तरस न आया, वो तो उल्टा मेरी चुचियों को चूसने और काटने लगा। पर उसने लण्ड को वहीं रोक दिया। थोड़ी देर में मुझे कुछ आराम सा महसूस होने लगा तो मैने उसे बताया। अब उसने लण्ड को धीरे धीरे गति देनी चालू की। उसने धक्के अब भी मेरी चूत को फाड़े दे रहे थे। भंयकर दर्द हो रहा था लेकिन ये उस जानलेवा दर्द के आसपास भी नहीं था जो पहले झटके में शायद क्रीम के कारण हो गया था।

थोड़ी ही देर में मुझको भी मजा सा आने लगा। उसके धक्के अभी भी दर्द पैदा कर रहे थे पर उस दर्द में भी एक अलग आनन्द की अनुभूति हो रही थी। मेरी चूत में से पता नहीं क्या कुछ निकल कर रिस रहा था। पर उसका चूमना चाटना और बीच बीच में काटना अलग ही था। मैनें इतना आनन्द अनुभव किया जो जिन्दगी में पहले नहीं किया था। पर बात उससे आगे की भी थी। करीब २० मिनट बाद उसने अचानक धक्कों की स्पीड बढा दी। मैने भी सहयोग करने का निश्चय करके नीचे से चूतड़ उछालने लगी।

दोनो अपने वेग में थे कि अचानक मेरी चूत में कुछ संकुचन सा हुआ और मैनें उसको कस के चिपटा लिया, अपने नाखून उसकी कमर में गाड़ दिये। तभी मैनें अपनी चूत में कुछ गर्म गर्म लावा सा गिरता हुआ महसूस किया। कुछ ही मिनटों में हम दोनो शान्त हो गये थे। पर आखिर के वो एक-दो मिनट में जो आनन्द आया उसके सामने शायद जन्नत का सुख भी फीका हो। मैं उसकी मुरीद हो गयी। उसने उसके बाद लण्ड निकाला और मेरे मुँह में डाल दिया, मैने उसे बड़े प्यार से चाट-चाट कर साफ किया।

फिर जब मैनें बैठकर अपनी चूत रानी को देखा तो मेरे मुँह से चीख सी निकल गयी। चूत का भोसड़ा तो बन ही गया था साथ ही उसमें से खून भी रिस रहा था। मैं यह देखकर डर गयी थी। पर उसने हिम्मत बंधायी। पता नहीं उसने मुझे वापस लिटाकर मेरी चूत में कपड़े से और क्रीम से क्या क्या किया पर सुकून था कि खून रूक गया था। अब थकान बहुत महसूस हो रही थी। सो थोड़ी देर लेटी रही।

फिर उसके सहारे से उठी और बदन झाड कर कपड़े पहने। कपड़े पहनकर उसकी तरफ मुस्कुराकर देखा तो उसने फिर एक बार मेरे निचले होंठ को चूसना शुरू कर दिया और चुचियों को दबाने लगा। मुझे बहुत आनन्द आया और सच में अगर घर वापिस लौटने में टाइम का ख्याल नहीं होता तो मैं उसे हटने को कभी नहीं कहती। उसके बाद हमने उस जंगल वाले कालेज की कई क्लासेज अटेण्ड की। पर अब गन्ना कट जाने से हमें बड़ी दिक्कत हो गई है। खैर, भगवान ने चाहा तो उसका इन्तजाम भी हो जायेगा। अच्छा मैं अपनी कहानी यहीं पर बन्द करती हूँ।

सम्पादक महोदय से गुजारिश है कि मेरा नाम भले ही छाप दें पर मेरे गाँव और जिले का नाम साइट पर न दें नहीं तो मेरी पूरे कालेज में बदनामी हो सकती है। मैं जानती हूँ मेरे कालेज कई लड़के लड़कियाँ अर्न्तवासना पर कहानियाँ पढने के शौकीन हैं।

pinky007.lucknow@gmail.com

कोलेज़ की दो लड़कियाँ, मैं अकेला

March 7th, 2009
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प्रेषक : सिद्धार्थ राणा

यह आज से ८ साल पहले की बात है जब मैं बी. कॉम फाइनल इयर में पढता था। हमारे कॉलेज में बहुत लड़कियाँ पढ़ती थी और हमारी क्लास में भी काफ़ी लड़कियाँ थी। लेकिन उनमें दो २ लड़कियाँ ऐसी थी कि जिन को देख कर मेरा लंड खड़ा हो जाता था और मैं सिर्फ़ उनकी तरफ़ देखता रहता था। एक का नाम पूजा था और दूसरी श्रुति।

पूजा मेरे साथ ज़्यादा खुली थी जबकि श्रुति इतनी नहीं थी। मैं हमेशा उनको चोदने का सोचा करता था लेकिन कभी भी मोका नहीं मिल सका था। एक दिन हमारी क्लास ख़त्म हुई तो हम सब विद्यार्थी नीचे आ गए। कुछ देर बाद मैंने देखा कि पूजा और श्रुति ऊपर जा रही हैं। मैंने उनका पीछा किया। वो दोनों क्लास में चली गई और दरवाज़ा बंद कर लिया। मैं दरवाज़े के साथ लग कर खड़ा हो गया और सोचा कि जैसे ही वो निकलेंगी तो मैं क्लास में अंदर जाने के बहाने किसी एक के बूब्स को हाथ लगा लूँगा।

लेकिन काफ़ी देर गुज़र जाने के बाद जब वो बाहर नहीं आई तो मैने दरवाज़े से कान लगा लिया। अंदर से कुछ सेक्सी आवाजें आ रही थी- आ आह ह्ह्ह्ह्छ हह ओह हह ह्ह्ह्ह्ह्छ हम मम् म्मम्म।

मैं समझ गया कि कुछ तो हो रहा है। मैं इधर उधर देखने लगा कि कहीं से कोई ऐसी जगह नज़र आए जहाँ से मैं उनको देख सकूं। अचानक मुझे खिड़की में एक छेद नज़र आया और मैं वहां से उनको देखने लगा।

वो दोनों बिल्कुल नंगी थी, उनके कपड़े साइड वाली कुर्सी पर रखे हुए थे और वो लेस्बियन एन्जॉय कर रही थी। पूजा श्रुति की योनि चाट रही थी और श्रुति दर्द और सेक्स के मारे आवाजें कर रही थी। जब मैंने उनको ऐसा करते देखा तो मेरा लंड भी खड़ा हो गया और ऐसा लग रहा था कि अभी अंडरवियर फाड़ कर बाहर आ जाएगा।

श्रुति चीख रही थी- हाँ हाँ ! कर पूजा कर ! और तेज़ कर ! फ़टाफ़ट जोर जोर से कर !

कोई १० मिनट बाद मैंने देखा कि श्रुति की टाइट चूत से एकदम सफ़ेद रस बाहर निकला जो सीधा पूजा के चेहरे पर गिरा और पूजा उसे मजे से चाटने लगी और श्रुति से कहा कि तुम भी चाटो। श्रुति बिल्कुल मदहोश हो गयी थी।

इसके बाद पूजा कुर्सी पर बैठी और श्रुति से कहा कि अब तुम मेरी योनि को चाटो। श्रुति ने जब उसकी टांगों को खोला तो यह देख कर मैं बहुत हो गया कि पूजा की चूत खुली थी बिल्कुल ब्लू फिल्मों की लड़कियों की चूत की तरह।

मुझे बहुत हैरत हुई। श्रुति ने पूजा से कहा कि तुम्हारी चूत इतनी खुली क्यूँ है, तो पूजा ने कहा कि श्रुति ज़ान ! तुम ने आज यह पहली बार किया है, जब तुम रोज़ करोगी और अपनी ऊँगली चूत में अन्दर बाहर करोगी तो तुम्हारी चूत भी ऐसी हो जाएगी और मैं तो रोज़ चुदाई भी करवाती हूँ। अगर तुम हमारे घर आओ तो मैं तुम्हें भी चुदवाऊंगी अपने पड़ोसी से, बहुत मज़ा आता है और मेरी एक इच्छा है कि मेरी चूत इतनी खुल जाए कि मैं अपना पूरा हाथ इस में अंदर ले सकूं।

कोई ८-१० मिनट बाद पूजा भी चरमसीमा पर पहुँच गई और वो दोनों अपने कपड़े पहनने लगी कि अचानक मेरे मुंह से आवाज़ निकली और मैं भी झड़ हो गया।

उन्होंने वो आवाज़ सुन ली तो श्रुति ने कहा कि शायद कोई हमें देख रहा था, तो पूजा बोली कोई बात नहीं मैं देखती हूँ पूजा ने दरवाज़ा थोड़ा सा खोला क्योंकि वो अभी भी नंगी थी और बोली कौन है ?

मैंने हिम्मत कर के कहा कि मैं राणा !

तो वो बोली कि क्यूँ आए हो ?

मैंने कहा कि अपनी पेन भूल गया था वो लेने आया हूँ।

उस ने कहा ठीक है अंदर आ जाओ !

मैं जैसे ही अंदर गया तो देखा कि वो दोनों अभी तक नंगी थी। श्रुति ने ब्रा और अंडरवियर पहना था जब कि पूजा बिल्कुल नंगी खड़ी थी। उसने मुझसे कहा कि मुझे पता था कि तुम ज़रूर आओगे क्यूँकि मैं तुम्हे रोज़ क्लास में देखती थी कि तुम सिर्फ़ हमारी गांड और स्तन को देखते हो लेकिन तुम कुछ कर नहीं सकते थे। मुझसे ज़्यादा तुम इस ब्लैक ब्यूटी श्रुति को पसन्द करते हो, जब वो चलती है तो तुम्हारी नज़र उसके शरीर को घूरती है।

मैं भी तुमको देखती थी लेकिन कुछ कह नहीं सकती थी। आज तुम आए हो तो तुम मेरी और मैं तुम्हारी प्यास बुझाऊंगी। यह कह कर उसने मुझे किस करना शुरू कर दिया और मैं भी उसे किस करने लगा श्रुति हम दोनों को देख रही थी वो बहुत डरी हुई लग रही थी।

मैंने उसको हाथ से पकड़ कर अपनी तरफ़ खींच लिया और पूजा से कहा कि प्लीज़ तुम मेरा लंड अपने मुंह में ले लो। पूजा ने मेरे लंड को चूसना शुरू किया और मैं श्रुति को किस करने लगा। मैंने उसका ब्रा खोल दिया और उसके अनछुए सांवले मुम्मे चूसने लगा वो बेकरार हो रही थी तो मैंने कहा कि तुम भी मेरा लंड चूस कर मज़ा लो।

तो उस ने कहा कि नहीं यह बहुत गन्दा है !

तो मैंने उसको कहा कि देखो पूजा कैसे मज़ा ले रही है तुम भी ले लो !

लेकिन वो नहीं मानी तो पूजा और मैंने ज़बरदस्ती उस के मुंह में अपना लंड डाल दिया तो उस ने धीरे धीरे चूसना शुरू किया उससे मज़ा आने लगा और वो चूसती रही। १५ मिनट के बाद मैं ने उसका मुंह अपनी क्रीम से भर दिया तो पूजा जो श्रुति की चूत को चाट रही थी अचानक ऊपर उठी और क्रीम उसके मुंह से अपने मुंह में लेने लगी।

अब मैं उन दोनों को चोदना चाहता था तो मैंने पूजा से कहा कि मैं पहले श्रुति को चोदना चाहता हूँ !

तो उस ने कहा कि वो अभी कुँवारी है बहुत मुश्किल है यहाँ !

लेकिन मैंने कहा कि प्लीज़ !

तो उस ने कहा ठीक है लेकिन श्रुति के मुंह पर कोई कपड़ा बांधो तो मैंने उसका ब्रा उसके मुंह पर बाँध दिया और अपना ७.५” इंच का लंड उसकी चूत पर रख दिया और आहिस्ता आहिस्ता धक्के मारने लगा, उसे बहुत मज़ा आ रहा था। फिर आहिस्ता आहिस्ता मैंने ज़ोर लगाना शुरू कर दिया।

आहिस्ता आहिस्ता मेरा लंड उसकी चूत को चीरता हुआ अंदर जा रहा था और वो अपने हाथों से मेरा लंड हटाने की कोशिश कर रही थी। लेकिन मैंने उस के हाथ पकड़ कर एक ज़ोरदार धक्का लगाया और अब मेरा पूरा लंड उसकी चूत में था। वो एक दम ऊपर उठी और नीचे गिर गयी। वो बेहोश हो गयी थी, उसकी चूत से खून बहने लगा था।

अब हम दोनों भी परेशान हो गए कि इसको होश में कैसे लाएं। वहाँ पर पानी भी नहीं था। मैंने पूजा से कहा कि अब क्या किया जाए तो पूजा ने कहा- तुम मेरे मुँह में पेशाब करो, मैं तुम्हारा पेशाब श्रुति पर छिड़कती हूँ।

मैंने अपना लण्ड श्रुति की चूत से निकाल कर पूजा के मुँह में डाल दिया और पेशाब कर दिया। अभी पूजा ने थोड़ा ही पेशाब छिड़का था कि श्रुति होश में आ गई। पूजा ने बाकी पेशाब पी लिया और बोली- वाह ! क्या स्वादिष्ट पेशाब है तुम्हारा !

श्रुति ने और चुदाई से मना कर दिया और कहा कि आज़ बहुत दर्द हो रहा है। लेकिन पूजा ने उसे समझाया कि पहले दर्द होगा फ़िर मज़ा आएगा।

बड़ी मुश्किल से वो मानी तो मैंने फ़िर अपना लण्ड उसकी चूत में डाल दिया और धक्के मारने लगा। अब उसे मज़ा आ रहा था। कुछ देर बाद मैंने महसूस किया कि श्रुति की चूत से क्रीम बाहर निकल रही है तो मैंने ज़ोर ज़ोर से धक्के मारने शुरू कर दिए और २५ मिनट बाद मेरी क्रीम श्रुति के मुँह में थी। मैं भी तीन बार झड़ चुकने के बाद काफ़ी कमजोरी महसूस कर रहा था इसलिए पूजा से कहा कि तुम्हें कल करूंगा। तो वो बोली- नहीं एक बार तो आज ही करो !

मेरा लण्ड बिल्कुल ढीला हो गया था और उसने चूस कर उसको दोबारा तैयार किया तो मैंने पूजा को भी चोदा और जब उसे चोद रहा था तो श्रुति बोली- प्लीज़ ! मुझे दोबारा करो !

तो मैंने उसको भी दूसरी कुर्सी पर बिठा कर उसकी टांगें ऊपर कर ली।

अब थोड़ी देर श्रुति और थोड़ी देर पूजा को चोद रहा था और कोई ३५ मिनट के बाद मैंने अपनी क्रीम पूजा की चूत में ही निकाल दी।

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